इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान की जानकारी इन हिंदी - indravati national park in hindi - Tourist and travel place

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Friday, January 31, 2020

इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान की जानकारी इन हिंदी - indravati national park in hindi


         इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान, indravati national park
        'इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान' छत्तीसगढ़ राज्य का प्रसिद्ध उद्यान तथा पर्यटन स्थल है। यह उद्यान छत्तीसगढ़ का एक मात्र 'टाइगर रिजर्व' है।


• राज्य - छत्तीसगढ़

• ज़िला - बीजापुर

• स्थापना - 1981

• क्षेत्रफल - 2799.08 वर्ग किलोमीटर

      1983 में ऐशिया का प्रथम बायोस्फेयर रिजर्व घोषित।(वर्तमान में नहीं)

        इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान का नाम पास में इंद्रावती नदी के नाम पर है।पार्क इंद्रवती नदी से अपना नाम प्राप्त करता है, जो पूर्व से पश्चिम तक बहता है और भारतीय राज्य महाराष्ट्र के साथ आरक्षित की उत्तरी सीमा बनाता है।यह छत्तीसगढ़ के बेहतरीन और सबसे मुख्य वन्यजीव उद्यानों में से एक माना जाता है। उद्यान पशुओं, पक्षियों और सरीसृप की व्यापक प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है।

इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़, indravati national park chhattisgarh
         इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान 1981 में एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में 1983 में इसे भारत के प्रसिद्ध प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।देश के तीसरे सबसे बड़े इंद्रावती टाइगर रिजर्व में अब एक भी बाघ नहीं हैं। इस वजह से बीजापुर स्थित टाइगर रिजर्व का बजट भी रोक दिया है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए ) ने बाघों की गणना के साक्ष्यों को नकारते हुए अपने निष्कर्ष में ये दावा किया है। जबकि बाघों की संख्या को देखते हुए 2009 में इंद्रावती वनक्षेत्र को देश के तीसरे सबसे बड़े टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। यहां 1983 में यहां प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत की गई थी।

        जंगली जीवों में आप यहां  तेंदुआ, स्लोथ भालू, गीदड़ जंगली भैंस, गौर, नीलगाय, काला हिरण, सांभर, चितल, जंगली सूअर आदि को देख सकते हैं। इसके अलावा आप यहां मगरमच्छ, बड़ी छिपकली, रॉक पाइथन, कोबरा, वाइगर जैसे जीवों को भी देख सकते हैं। इन सब के अलावा आप यहां पक्षियों की भी कई प्रजातियों को देख सकते हैं। वन्यजीवन को करीब के देखने का यह उद्यान एक आदर्श विकल्प है।

       छत्तीसगढ़ का एकमात्र कुटरू गेम सेंचुरी इसी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है।
इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान, indravati national park
       यहां एक विशाल चरागाह भी है जो जंगली भैंस, गौरा, हिरण, नीलगाय और अन्य वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक चारा के रूप में कार्य करता है। मनोरंजन केंद्र में सबसे अधिक खोजा जाने वाले पेड़ सागौन, लेंडिया, सलाई, महुआ, तेंदू, सेमल, हल्दू, बेर और जामुन हैं। इसी तरह पार्क में अभयारण्य प्रदान करता है, जिसमें से पहाड़ी की मुख्य किस्मों में से एक प्रमुख प्रजाति है। पार्क की यात्रा का सबसे अच्छा मौसम पंद्रह दिसंबर से पंद्रह जून तक है।

        यह प्रकृति प्रेमी के लिए बहुत अच्छी जगह है। यहां पर हर साल बहुत सारे पर्यटक आते हैं

• इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान कैसे पहुंचे


1.हवाई मार्ग से :


      रायपुर (486 किमी) निकटतम हवाई अड्डा है। रायपुर हवाई अड्डा सभी मुख्य हवाई अड्डे से जुड़ा हुआ है। रायपुर से बस या टैक्सी लेकर इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान पहुंच सकते हैं।

2.रेल मार्ग से :


       रेलवे स्टेशन जगदलपुर (168 किमी) है जहाँ से बसों के रूप में आसानी से उपलब्ध है। जगतपुर रेलवे स्टेशन नियर रेलवे स्टेशन और सभी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यहां से आप बस या टैक्सी से इंद्रावती पहुंच सकते हैं। आपका सफर भी बहुत आराम जाए और अच्छा रहेगा क्योंकि इंद्रावती तक पहुंचने का सड़क का बहुत ही अच्छी है।

3.सड़क मार्ग से :


        इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान बस्तर के जिला मुख्यालय जगदलपुर से आसानी से उपलब्ध है। अब बस या टैक्सी लेकर सड़क मार्ग से इंद्रावती पहुंच सकते हैं छत्तीसग़़ढ मार्ग परिवहन बहुत ही अच्छा है। आपका सफर भी आराम जाएगी रहेगा।

          छत्तीसगढ़ भारत का एक राज्य है। इसका गठन १ नवम्बर २००० को हुआ था और यह भारत का २६वां राज्य है। पहले यह मध्य प्रदेश के अन्तर्गत था। डॉ॰ हीरालाल के मतानुसार छत्तीसगढ़ 'चेदीशगढ़' का अपभ्रंश हो सकता है। कहते हैं किसी समय इस क्षेत्र में 36 गढ़ थे, इसीलिये इसका नाम छत्तीसगढ़ पड़ा। किंतु गढ़ों की संख्या में वृद्धि हो जाने पर भी नाम में कोई परिवर्तन नहीं हुआ,छत्तीसगढ़ भारत का ऐसा राज्य है जिसे 'महतारी'(मां) का दर्जा दिया गया है।भारत में दो क्षेत्र ऐसे हैं जिनका नाम विशेष कारणों से बदल गया - एक तो 'मगध' जो बौद्ध विहारों की अधिकता के कारण "बिहार" बन गया और दूसरा 'दक्षिण कौशल' जो छत्तीस गढ़ों को अपने में समाहित रखने के कारण "छत्तीसगढ़" बन गया। किन्तु ये दोनों ही क्षेत्र अत्यन्त प्राचीन काल से ही भारत को गौरवान्वित करते रहे हैं। "छत्तीसगढ़" तो वैदिक और पौराणिक काल से ही विभिन्न संस्कृतियों के विकास का केन्द्र रहा है। यहाँ के प्राचीन मन्दिर तथा उनके भग्नावशेष इंगित करते हैं कि यहाँ पर वैष्णव, शैव, शाक्त, बौद्ध संस्कृतियों का विभिन्न कालों में प्रभाव रहा है। एक संसाधन संपन्न राज्य, यह देश के लिए बिजली और इस्पात का एक स्रोत है, जिसका उत्पादन कुल स्टील का 15% है।छत्तीसगढ़ भारत में सबसे तेजी से विकसित राज्यों में से एक है।

        छत्तीसगढ़ के उत्तर में उत्तर प्रदेश और उत्तर-पश्चिम में मध्यप्रदेश का शहडोल संभाग, उत्तर-पूर्व में उड़ीसा और झारखंड, दक्षिण में तेलंगाना और पश्चिम में महाराष्ट्र राज्य स्थित हैं। यह प्रदेश ऊँची नीची पर्वत श्रेणियों से घिरा हुआ घने जंगलों वाला राज्य है। यहाँ साल, सागौन, साजा और बीजा और बाँस के वृक्षों की अधिकता है। यहाँ सबसे ज्यादा मिस्रित वन पाया जाता है। सागौन की कुछ उन्नत किस्म भी छत्तीसगढ़ के वनो में पायी जाती है। छत्तीसगढ़ क्षेत्र के बीच में महानदी और उसकी सहायक नदियाँ एक विशाल और उपजाऊ मैदान का निर्माण करती हैं, जो लगभग 80 कि॰मी॰ चौड़ा और 322 कि॰मी॰ लम्बा है। समुद्र सतह से यह मैदान करीब 300 मीटर ऊँचा है। इस मैदान के पश्चिम में महानदी तथा शिवनाथ का दोआब है। इस मैदानी क्षेत्र के भीतर हैं रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जिले के दक्षिणी भाग। धान की भरपूर पैदावार के कारण इसे धान का कटोरा भी कहा जाता है। मैदानी क्षेत्र के उत्तर में है मैकल पर्वत शृंखला। सरगुजा की उच्चतम भूमि ईशान कोण में है। पूर्व में उड़ीसा की छोटी-बड़ी पहाड़ियाँ हैं और आग्नेय में सिहावा के पर्वत शृंग है। दक्षिण में बस्तर भी गिरि-मालाओं से भरा हुआ है। छत्तीसगढ़ के तीन प्राकृतिक खण्ड हैं : उत्तर में सतपुड़ा, मध्य में महानदी और उसकी सहायक नदियों का मैदानी क्षेत्र और दक्षिण में बस्तर का पठार। राज्य की प्रमुख नदियाँ हैं - महानदी, शिवनाथ, खारुन, अरपा, पैरी तथा इंद्रावती नदी।

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