कच्छ ओफ रन के दर्शनीय स्थल की जानकारी - kutch of rann Best Tourist place guide - Tourist and travel place

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Monday, January 13, 2020

कच्छ ओफ रन के दर्शनीय स्थल की जानकारी - kutch of rann Best Tourist place guide


Jinesh_mehta

      कच्छ गुजरात राज्य का ऐक जिला है. यह 45652 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ गुजरात का सबसे बड़ा रेतीला जिला है. कच्छ का ज्यादातर बड़ा हिस्सा रेतीला ओर दलदली है. कच्छ में बहुत सारे पर्यटक स्थल है. जो पर्यटकों को आकर्षित करतें हैं. कच्छ का सफेद रण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. ओर कच्छ में बहुत सारे मन्दिर, बीच, अभ्यारण है. पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सरकार द्वारा कच्छ प्रचार किया जाता है. "कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा" यह ऐट टीवी पर प्रसारित किया जाता है.

      कच्छ प्राचीन सिन्धु संस्कृति का हिस्सा माना जाता है. उत्तर तथा पुर्व फेला हुआ दुनिया का सबसे बड़ा नमक का रेगिस्तान कच्छ में है. जिसे सफेद रण के नाम से जाना जाता है. यहां से पाकिस्तान की बोडर लगती है. हर साल यहां पर रण उत्सव का आयोजन भी किया जाता है. रण उत्सव में देश-विदेश से लाखों लोग रण उत्सव का आनंद लेने आते हैं. कच्छ कला और संस्कृति का गढ़ माना जाता है. यहां पर आपको भाषा, कला, कच्छी लोकगीत कपड़े सब में आपको संस्कृति की झलक दिखाई देगी.

      कच्छ में आप रण की सफारी का आनंद ले सकते हैं. ऊंट पर बेठ कर आप रण को देखने मज़ा ले सकते हैं. यहां का सफर आपको मंत्रमुग्ध कर देगा. चलिए आज हम जानते हैं कच्छ अच्छे पयटक स्थल के बारे में.

1:- धोलावीरा - dholavira

    
dholavira

     गुजरात के कच्छ जिले में खडीर में धोलावीरा गांव के पास पांच हजार साल पहले यह विश्र्व का प्रचिन महानगर था. उस जमाने में 50,000 लोग यहां रहते थे. 4000 हजार साल पहले इस महानगर का पतन हुआ. हड़प्पा संस्कृति के इस नगर की पता 1960 में हुई और इसकी खुदाई 1990 तक हुई. धोलाविरा का विस्तार 100 हेक्टर क्षेत्रफल में फैला हुआ था. आपको प्राचीन स्थल देखना पसंद करते हो तो ऐक बार मुलाकात जरूर करें धोलावीरा गांव की.

2:- विजय विलास पैलेस - vijay vilas palace


vijay vilas palace

      विजय विलास पैलेस गुजरात राज्य के कच्छ जिले के मांडवी स्थित हैं. यह ऐक रजवाडी महेल है. मांडवी शहर के दरिया किनारे पर स्थित विजय विलास पैलेस कच्छ का पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. विजय विलास पैलेस का निर्माण 1920 जयपुर के शिल्पकार  किया गया है. ईस पैलेस में आपको राजपूत शैली की झलक दिखाई देगी. समुद्र किनारे स्थित यह पैलेस पर्यटकों को आकर्षित करता है और यहां पर देश-विदेश से पर्यटक घुमने आते हैं.

3:- काला डुंगर - kala dungar

       
kala dungar kutch

       काला डुंगर कच्छ का सबसे ऊंचा शिखर है. ईस डुंगर की ऊंचाई 458 मीटर है. भुज से 98 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह ऐक मात्र इसी जगह है जहां से कच्छ का 360° का नजारा देखने को मिलता है. यह पाकिस्तान के सरहद के पास स्थित है यहां पर लश्कर के जवानों की सावनी है. यहां से आगे सिर्फ सैनिक ही जा सकते हैं. काला डुंगर पर भगवान दत्तात्रेय का 400 साल पुराना ऐक मन्दिर भी है. आप कच्छ की यात्रा पर जाइ तो एक बार काला डुंगर पर जरुर जाई. यहां कच्छ का सूर्य अस्त बिंदु का नजारा देखने के लिए बहुत सारे पर्यटक आते हैं. साम के वक्त सूर्य अस्त का सोनेरी ओर मनमोहन नजारा दिखता है.

4:- मांडवी बीच - mandvi beach


mandvi beach

     मांडवी बीच कच्छ जिले के मांडवी शहेर में स्थित है. मांडवी बीच कच्छ के मुख्य आकर्षण केंद्रों में से एक है. मांडवी बीच की यात्रा बगेर कच्छ की यात्रा व्यर्थ है. कच्छ खाड़ी में स्थित यहां बीच पुरे देश भर में लोकप्रिय है. मांडवी की स्थापना 1581 में कच्छ के जाडेजा शासक द्वारा किया गया था. उस समय मांडवी व्यावसायिक नगर के  था उस वक्त यहां पर 400 समुद्री जहाज थे.

     मांडवी बीच पर्यटकों की दृष्टि से भी बहुत लोकप्रिय है. यहां पर आप ऊंट की सवारी, फ़ोटोग्राफ़ी, तेरना ये कर सकते हैं. बीच की खुबसूरत नजारा दिखता है, विजय विलास पैलेस भी मांडवी बीच पर स्थित है.

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5:- आइना महेल भुज - Aina palace bhuj


Aina mahel bhuj kutch

       आइना महल 18 मी सदी में बना हुआ पुराना पैलेस है जो भूज ज़िले के दरबारगढ़ में स्थित है. आइना महेल को गुजराती में शीशा महेल से भी जाना जाता है. आइना महल का निर्माण राजा राव लखपतजी ने 1750 में करवाया था. लखपतजी के शिल्पकार रामसिंह ने मलम ने इस महेल का डिजाइन तैयार किया था. महेल को सजाने के लिए दर्पण, कांच, ओर टायल्स का उपयोग किया गया था. आइना महेल को 1977 में संग्रहालय का बना दिया और लोको के लिए खुला कर दिया. 2001 में गुजरात में आई हुई बड़े भुकंप ने इस महेल को बहुत क्षति पहुंचाई बाद में 2003 में रिनोवेशन किया गया. आप कच्छ की यात्रा पर जाइ तो भुज के आइना महेल की मुलाकात जरूर करें.

6:- प्राग महेल - prag palace 


prag Mahal

       प्राग महेल ओर आइना महेल दोनों भुज के दरबारगढ़ में स्थित है. प्राग महेल का निर्माण 19 मी सदी में राव प्रागमलजी द्वारा महेल के निर्माण की 1865 में शुरुआत हुई थी. इस महेल का निर्माण इटालियन गोथीक शैली में हुआ है. महेल के बांधकाम के लिए इटालियन शिल्पकारों को लाया गया था. यह महेल बनाने का खर्च उस वक्त 31 लाख रुपए हुआ था. 1879 में खेगराजी के राज महेल निर्माण का कार्य समाप्त हुआ. लगान, हम दील दे चुके सनम जेसी प्रख्यात फिल्मो का सुटिग यहां किया गया था.

       महेल में राजाओं से जुड़ी वस्तुओं को महेल में रखा गया है. जो उस वक्त की राजाओं की जीवन शैली को दर्शाता है. यह हर साल देश-विदेश से बहुत सारे पर्यटक आते हैं.

7:- श्री स्वामीनारायण मंदिर - shree swaminarayan temple


shree swaminarayan temple bhuj

    श्री स्वामीनारायण मंदिर संगमरमर ओर सोने से किया गया है. 2001 में आऐ भूकंप ने मन्दिर को काफी नुकसान पहुंचाया था. बाद में मन्दिर की मरम्मत की गई. आज भी मंदिर की समक वैसे की वैसी है. मंदिर शहर से थोडी दूरी पर स्थित है. इस लिए आप यहां पर शान्त वातावरण का आनंद ले सकते हैं. यह मंदिर का निर्माण स्वामीनारायण संप्रदाय ने करवाया था. मंदिर में स्वामीनारायण ओर राधा कृष्ण की मुर्तियां है. पुराने मंदिर के पास नये मंदिर का निर्माण किया गया है. यह मंदिर 5 ऐकड में स्थित है. कच्छ की यात्रा पर जाइ तो भुज में स्थित स्वामीनारायण मंदिर के दर्शन करने जाएं.

8:- कच्छ संग्रहालय - kutch museum

        
kutch museum

       कच्छ संग्रहालय गुजरात का प्राचीन और ऐतिहासिक संग्रहालय में से एक है. हमीरसर तालाब के पास यह स्थित है. कच्छ संग्रहालय की स्थापना 1 जुलाई 1877 के दिन किया गया. यह संग्रहालय में 11 विभाग है. पुरातत्व विभाग में सिंधु मुद्दाये है. ओर अलग अलग प्रकार की पत्थर की गोलियां भी है. कच्छ कि जिवन शैली को दर्शाती चल-चित्र भी है. पुराने समय के संगीत साधन भी यहां आपको देखने को मिलें गे. यहां पर प्राचीन जीवन शैली को दर्शाती है. यह गुजरात का ऐक मात्र प्राचीन संग्रहालय है. जो 2010 में पहला ओनलाइन वच्युंवल संग्रहालय बना.

9:- कच्छ रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य - kutch wildlife sanctuary

      
kutch desert wildlife sanctuary, कच्छ रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य

        कच्छ रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य गुजरात राज्य के कच्छ के रण में स्थित है. यह गुजरात का सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य है. यह रेगिस्तान वन्यजीव अभयारण्य  7505.22 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. रण वन्यजीव अभयारण्य में वन क्षेत्र, राजस्व बंजर भूमि, अरब सागर के क्षेत्रीय जल शामिल हैं. यहां अभ्यारण में कई दुर्लभ जंगली जानवरों जैसे लोमड़ी,पोक्युपिन, ओर ज़हरीले सांप ओर स्टार कछुए पाएं जाते हैं. पक्षीओ दुर्लभ प्रजातियों काला गिद्व, सफेद गिद्व, सारस, कोआ भी यहां पर पाई जाती है. ओर यहां पर गीदड़, हाइना, चिंकारा, निलगाय, जंगली सूअर, इंडियन फोक्स, सियार जेसी प्रजातियों पाई जाती है. कच्छ की यात्रा पर आई तो कच्छ के रण वन्यजीव अभयारण्य में दुर्लभ प्रजातियों को देखने जाई.

10:- कच्छ का सफेद रण ओर रण उत्सव - White Rann and Rann Festival of Kutch

      
White Rann, सफेद रण
White Rann 

      कच्छ का रण गुजरात के कच्छ जिले के उत्तर तथा पुर्व में फैला हुआ नमकीन दल-दल का विरान प्रदेश है. यह लगभग 23,300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ नमक का रेगिस्तान हैं. 1819 के भुकंप में उत्तरी रन का  मध्य भाग अपेक्षा से अधिक उपर उभड गया. इसकेे परिणामस्वरूप मध्य भाग सुखा तथा किनारे पर पानी ओर दल-दल से भरें. गर्मी में जब यह दल-दल सुखते है तब यहां पर नमक की परत जम जाती है. ओर यह पुरा विस्तार सफेद दिखाई देता है. इस लिए कच्छ के रण को सफेद रण से भी जाना जाता है.
     
Rann utsav, रण उत्सव
Rann utsav
        सफेद रण में हर साल रण उत्सव का आयोजन किया जाता है. हर साल यहां पर टेंट सिटी बनाया जाता है. यह रण उत्सव पहले सिर्फ 3 दिन का होता था लेकिन बाद में इसे 38 दिनों का कर दिया. यहां पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में पर्यटक रण उत्सव की मुलाकात करने आते हैं. यहां पर आप ऊंट की सवारी, कच्छ का संगीत, रात में सफेद रण की चांदनी को देखने का लुत्फ उठा सकते हैं. हर साल नवंबर से फरवरी के बीच रण उत्सव का आयोजन किया जाता है. यह रण उत्सव पुरी दुनिया में मसहुर है यहां पर विदेशी लोग भी बड़ी संख्या में आते हैं. आफ कच्छ यात्रा पर जाइ तो कच्छ के रण उत्सव ओर सफेद रण की यात्रा जरुर करे.

11:- नारायण सरोवर - Narayan sarovar

        
narayan sarovar, नारायण सरोवर

        नारायण सरोवर कच्छ के लखपत तालुका में स्थित है. यह मन्दिर हिन्दूओं का प्राचीन तीर्थ स्थल है. कोटेश्वर महादेव मंदिर यहां से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. श्री मद्भागवत गीता में वर्णित पांच पवित्र सरोवर में से एक है. नारायण सरोवर का अर्थ 'विष्णु का सरोवर' यहां सिंधु नदी सागर से मिलती हैं. यहां पर नारायण सरोवर है. नारायण सरोवर पर कार्तिक पूर्णिमा से तिन दिन का भव्य मेला लगता है. नारायण सरोवर में हर साल श्रद्धालु ओर यात्रालू दर्शन करने आते हैं. कच्छ के रण में जाई तो एक बार नारायण सरोवर के दर्शन करने जरुर जाई.
       

12:- लखपत क़िला - lakhpat fort


lakhpat fort, लखपत क़िला

        लखपत क़िला कच्छ के लखपत में पाकिस्तान और कच्छ की बोडर के पास स्थित है. लखपत क़िला 7 किलोमीटर लंबे और 18 मी सदी की दीवारों से घिरा हुआ क़िला है.  कच्छ के रण से लखपत क़िला 145 किलोमीटर की दूरी पर है. शहर का नाम  राव लाखा के नाम पर रखा गया है. जिन्होंने तेरहवीं शताब्दी के मध्य में सिंध प्रांत पर शासन किया था. यह क़िला कच्छ और गुजरात का ऐतिहासिक किला है. इतिहास को जानने वाले ओर कच्छ आने वाले यात्रि लखपत कि मुलाकात करते हैं.

        हर साल कच्छ और कच्छ रण उत्सव में देश-विदेश से लाखों लोग रण उत्सव कि यात्रा करते हैं. गुजरात का सबसे ज्यादा आकर्षक केंद्रो में से एक है. आप भी कच्छ यात्रा पर एक बार जरूर करें.
       

कच्छ ओफ रण केसे पहुंचे - how to reach  Kutch of rann


       : हवाई मार्ग से कच्छ केसे पहुंचे -  How to reach Kutch by flight



how to reach  Kutch of rann flight

          कच्छ के भुज का हवाई अड्डा दिल्ली, मुम्बई, बेंगलुरु, से जुड़ा हुआ है. भुज से कच्छ और रण की दूरी 80 किलोमीटर दूर है. भुज से आप टेक्सी,  या फिर आप गुजरात टुरिजम बस से भी कच्छ के रण तक जा सकते हैं.

         : ट्रेन से कच्छ केसे पहुंचे - How to reach Kutch by train



how to reach  Kutch of rann by train

           आप ट्रेन से कच्छ और रण भी पहुंच सकते हैं. भुज का रेलवे स्टेशन दिल्ली, मुम्बई जैसे सभी मुख्य स्टेशन से जुड़ा हुआ है. यहां से आप सीधे भुज पहुंचे गे यहां से आप टेक्सी या कच्छ टुरिजम बस से भी कच्छ और रण पहुंच सकते हैं.

         : मार्ग से कच्छ केसे पहुंचे - How to reach Kutch by road



How to reach Kutch by road

            आप कच्छ और रण मार्ग से भी जा सकते हैं. आप दिल्ली, मुम्बई, पुणे, यहां से 16 घंटे में कच्छ के रण तक पहुंच सकते हैं. आप टेक्सी या बस भी ले सकते जो आप को सीधे कच्छ पहुंचा देंगे.
        

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