श्री सोमनाथ मंदिर का इतिहास और दर्शनीय स्थल की जानकारी - Somnath History And Tourist place Information - Tourist and travel place

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Thursday, January 16, 2020

श्री सोमनाथ मंदिर का इतिहास और दर्शनीय स्थल की जानकारी - Somnath History And Tourist place Information



 • सोमनाथ मंदिर का इतिहास

      
Somnath Temple


       सोमनाथ महादेव का मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र में समुद्र किनारे पर स्थित हैं. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंग में से पहला ज्योतिर्लिंग है. ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण चंद्रदेव ने स्वयं किया था. इसका वर्णन ऋग्वेद में भी लिखा हुआ है. इतिहास में इस मंदिर को कई बार तोड़ा गया और पुनर्निर्माण भी किया गया. वर्तमान समय के सोमनाथ मंदिर का निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल ने करवाया था. और बाद में दिसंबर 1995 को राष्ट्र को समर्पित कर दिया. सोमनाथ मंदिर विश्व विख्यात  धार्मिक पर्यटक और स्थल है. सोमनाथ मंदिर में रात 7:30 से 8:30 बजे तक लाइट सौ चलता है. लाइट से बहुत सुंदर और मनमोहक दिखता है और इसे देखने के लिए लाखों पर्यटक यहां जमा होते हैं. यहां पर श्री कृष्णा ने देहत्याग किया था. इस वजह से उस जगह का महत्व और भी बढ़ जाता है. 

       ईशा पूर्व एक मंदिर अस्तित्व में था जिसे दुबारा पुनर्निर्माण सातवीं सदी में वल्लभी के मित्रक राजाओं ने किया. 8 मी सदी में सिंध के गवर्नर जुनायद  ने इसे नष्ट करवा दिया. गुर्जर के राजा नागभट्ट ने 815 ईसवी में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया. अरब यात्री अल-बरुनी ने अपने यात्रा वृतान्त में इसका वर्णन लिखा था. इससे प्रभावित होकर मोहम्मद गजनी ने सन 1024 में 50,000 सैनिकों के साथ सोमनाथ मंदिर पर हमला किया और सोमनाथ मंदिर की सारी संपत्ति लूट ली और मंदिर को नष्ट कर दिया. 50,000 लोग अंदर पूजा अर्चना कर रहे थे सभी का कत्ल करवा दिया गया. इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण करवाया. 

         सोमनाथ मंदिर को 5 मी बार तब गिराया गया जब दिल्ली की सल्तनत ने गुजरात पर कब्जा किया लिया. मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे 1706 में दुबारा गिरा दिया. हाल में जो सोमनाथ मंदिर स्थित है उसे सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बनवाया और 1 दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया. सोमनाथ मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है और इस मंदिर को कई बार गिराया गया और बनाया गया और लूटा गया. मंदिर की भव्यता को देखकर ही से थोड़ा और लूटा गया. सोमनाथ मंदिर में बहुत सारा सोना था और इसके दरवाजे पर सुनने तेरे जो मोहम्मद गजनी लूटकर ले गया. सोमनाथ मंदिर के विश्व विख्यात है यहां पर हर साल बहुत सारे श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं.
      

    • सोमनाथ के दर्शनीय स्थल की जानकारी

    
       दोस्तों हमने सोमनाथ के इतिहास के बारे में जाना अब हम सोमनाथ के दर्शनीय स्थल के बारे में जानते है. 


1:- सोमनाथ मंदिर - somnath Temple

        
Somnath Temple


      सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र में वेरावल के पास समुद्र किनारे पर स्थित भव्य मंदिर है. यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंग में से पहला मंदिर है. यह मंदिर हिन्दूओं की आस्था के साथ जुड़ा हुआ है. हाल में स्थित मंदिर को बनाने में 5 साल लगे थे. नाथ मंदिर में रोज 7:30 से 8:30 बजे तक लाइट् सो होता है. सोमनाथ मंदिर सुबह 6:00 बजे से शाम के 6:00 बजे तक आप कभी भी दर्शन करने जा सकते हैं. मंदिर के अंदर आप निशुल्क जा सकते हैं. मंदिर में एक बगीचा है और यहां पर बैठने की व्यवस्था भी है. और यहां से समुद्र का नजारा बहुत ही सुंदर और मनमोहक दिखता है. आप भी एक बार सोमनाथ महादेव के दर्शन करने सोमनाथ जरूर आइए.


2:- त्रिवेणी घाट - triveni ghat

       
triveni ghat


       त्रिवेणी संगम सोमनाथ मंदिर के पास स्थित है. 3 पवित्र नदियां कपिल हिरण और सरस्वती का संगम होता है इसे त्रिवेणी संगम कहते हैं. यहां का नजारा बहुत ही सुंदर और मनमोहक है. इस घाट पर अंतिम संस्कार और पितरों के सभी कार्य किए जाते हैं. अर्जुन ने यहां पर श्री कृष्ण भगवान का अंतिम संस्कार किया था इस वजह से इसका महत्व बहुत ही ज्यादा है. यह संगम में हिंदुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है. यहां पर आप बोटिंग भी कर सकते हैं और संगम के दूसरे छोर पर एक मंदिर है वहां पर दर्शन भी कर सकते हैं. 


3:- लक्ष्मी नारायण मंदिर - Lakshmi Narayan Temple

          
Lakshmi narayana Temple


        सोमनाथ में या विष्णु भगवान का बहुत अच्छा मंदिर है. या मंदिर लक्ष्मी नारायण को समर्पित है. इस मंदिर में बहुत ही सुंदर लक्ष्मी और नारायण की मूर्ति है. मंदिर का वातावरण बहुत ही शांत है. आप यहां पर शांतिप्रिय वातावरण में समय विचार सकते हैं. यह मंदिर बहुत पुराना तो नहीं है लेकिन इसकी वास्तुकला बहुत अच्छी है. फोटोग्राफर के लिए बहुत अच्छी जगह है. आप इस मंदिर में कैमरा ले जा सकते हैं. 






4:- सोमनाथ बीच - somnath beach

         
सोमनाथ बीच - somnath beach


       सोमनाथ बीच सोमनाथ मंदिर के पास स्थित है. सोमनाथ मंदिर की तरह की सोमनाथ बिजी बहुत ही सुंदर और आकर्षक है. सोमनाथ महादेव के दर्शन के बाद आप यहां पर समुद्र के किनारे लहरों को देखते हुए समय व्यतीत कर सकते हैं. बीच पर आप होर्स राइटिंग कैमल राइडिंग भी कर सकते हैं. यहां पर सूर्यास्त का नजारा भी बहुत सुंदर दिखता है. आप यहां पर सूर्यास्त का नजारा भी देख सकते हो मनमोहक और बहुत ही सुंदर दिखता है. यहां पर बहुत सारे श्रद्धालु और यात्री के सोमनाथ मंदिर और सोमनाथ बीच पर आते हैं.


5:- सूर्य मंदिर - sun Temple

     
सूर्य मंदिर - sun Temple


       सोमनाथ मंदिर से 1 किलोमीटर की दूरी पर सूर्य मंदिर आया हुआ है. यह मंदिर सूर्य देव और छाया देवी को समर्पित है. माना जाता है कि यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. कथाओं के अनुसार माना जाता है कि पांडवों ने अपनी वनवास के दौरान यहां पर रहते थे और सूर्य भगवान की पूजा अर्चना करते हैं. इसलिए इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है. सूर्य मंदिर की वास्तुकला भी बहुत पुरानी है. 

         हाल स्थित सूर्य मंदिर की स्थापना 14 वीं शताब्दी के आसपास की गई है. मंदिर की दीवार पर हिंदू देवी देवताओं की तस्वीरों को अच्छी तरह से दर्शाया और दिखाया गया. यहां पर ब्रह्मा जी, विष्णु जी, सरस्वती, पार्वती, सीता माता, लक्ष्मी माता, की तस्वीर अच्छी तरह से दर्शाए गए हैं. साथ में देवी देवताओं के वाहन जैसे कि शेर, हाथी, मोर, और घोड़े इन सभी जानवरों की मूर्तियां भी दीवारों में देसाई गई है. सूर्य मंदिर वास्तुकला का सबसे उत्तम नमूना है.


6:- पांडव गुफा - pandav caves

     
 pandav caves


       त्रिवेणी संगम से थोड़ी ही दूरी पर पांडव गुफाएं हुई है. यह गुफा महाभारत काल से जुड़ी हुई है. कथाओं के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडव भाई यहां पर रहते थे. गुफा में पांडवों का एक मंदिर भी है. गुफा के अंदर मंदिर का निर्माण 1949 में स्वर्गीय बाबा नारायण दास ने की थी. यहां पर शंकर भगवान, सीता माता, राम भगवान, और हनुमान जी, के मंदिर भी स्थित है. यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा है इसलिए इसका महत्व भी बहुत है. यहां पर दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं. 


7:- भालका तीर्थ - bhalka tirth

         
Bhalka tirth Somnath


      भालका तीर्थ सोमनाथ से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. भालका तीर्थ द्वापर युग से जुड़ा हुआ है. यहां पर श्री कृष्ण भगवान के आखिरी लम्हों की गवाही देता है. भालका तीर्थ पर ही श्रीकृष्ण भगवान ने अपना देख किया किया और वैकुंठ धाम को चले गये. यहां पर भगवान श्री कृष्णा की एक मूर्ति है. यह मूर्ति उनके आखिरी लम्हों को दर्शाती है. भालका तीर्थ हिंदुओं की आस्था का केंद्र है. हर साल यहां पर लाखों श्रद्धालु आते हैं. भगवान श्री कृष्ण के आखिरी लम्हों के दर्शन करना.


8:- बाणगंगा ओर देहोत्सर्ग 

      
Banganga Somnath


       देहोत्सर्ग तीर्थ हिरण नदी के किनारे पर स्थित है. यहां पर श्री कृष्ण भगवान के पैरों के निशान आज भी मौजूद है. भगवान श्री कृष्ण के आखिरी कदमों के निशान का महत्व आज भी बहुत है. यहां पर एक मंदिर भी बना हुआ है. यहां पर श्री कृष्णा के कदमों के निशान रखे हुए हैं.

       पीपल के पेड़ के नीचे शिकारी ने श्रीकृष्ण पर बाण चलाया था उस जगह का महत्व बहुत है. उस जगह को अब बाणगंगा नाम से जाना जाता है. वहां पर एक शिवलिंग का निर्माण भी किया गया है. 


9:- परशुरामजी मंदिर - parshuram Temple

       
Parshuram Temple Somnath


       परशुराम का मंदिर त्रिवेणी घाट पर है स्थित है. कथाओं के अनुसार परशुराम भगवान ने क्षत्रियों को मारने के पाप से मुक्त होने के लिए शंकर भगवान का आशीर्वाद लेकर यहां पर तपस्या की थी. यह मंदिर त्रिवेणी घाट के पास में स्थित है. यहां पर दो प्राचीन कुंड है और तीन रचना गर्भगृह सभा मंडप है. मंदिर में भगवान परशुराम की एक मूर्ति है और दोनों तरफ़ काला और कामके के की मूर्ति है.


10:- गीता मंदिर - Geeta Temple

         
Geeta mandir Somnath


       गीता मंदिर त्रिवेणी संगम घाट पर स्थित श्री कृष्ण का मंदिर है. त्रिवेणी संगम पर ही श्रीकृष्ण भगवान ने देह त्याग  किया था. और इसी जगह के पास में गीता मंदिर बनाया गया है. जिसे बिरला परिवार ने 1970 में निर्माण किया था. संगमरमर से बना यह मंदिर अति सुंदर है और इसकी दीवारों पर भगवत गीता के श्लोक उकेरे गए हैं. गीता मंदिर के परिसर में बलराम गुफा, लक्ष्मी नारायण मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर भी है. 


11:- प्रभास पाटन म्यूजियम - prabhas patan museum

         
Prabhas patan museum


        प्रभास पाटन म्यूजियम सोमनाथ मंदिर के पास में ही स्थित है आप वहां पर चलकर भी जा सकते हैं. यहां पर 10, 11 और 12 वीं सदी के शिल्प संभाल कर रखे गए हैं. जब सोमनाथ मंदिर का पुनः निर्माण किया गया तब 108 नदियों का जल लाया गया था. उनमें से कई नदियों का जल संभाल कर प्रभास पाटन म्यूजियम में रखा गया है.  

     जब 1950 में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू हुआ तब खुदाई के वक्त यहां से पुरानी मूर्तियां और कई अवशेष मिले जिसे संभाल कर प्रभास पाटन म्यूजियम में रखा गया है. सोमनाथ मंदिर से जुड़ी हुई ऐतिहासिक और पुरानी वस्तुओं को देखना चाहते हैं तो प्रभास पाटन म्यूजियम की मुलाकात जरूर करें.


12:- प्राची - prachi        

Prachi tirth
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        सोमनाथ से 22 किलोमीटर की दूरी पर प्राची तीर्थ स्थित है. कथाओं के अनुसार प्राची महत्वपूर्ण और पवित्र धामों में से एक है. यहां पर मृत्यु के बाद की सारी विधियां होती है. काशी विश्वनाथ से भी प्राची का महत्व बहुत ज्यादा है. कथाओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने अपने पूर्वजों का अनुष्ठान और विधि यहीं पर किए थे. हिंदू धर्म में प्राची तीर्थ का महत्व बहुत ही ज्यादा है. यह अतीत श्री कृष्णा भगवान से जुड़ा हुआ है. पुरानी कथाओं के अनुसार पांडवों को ढूंढते ढूंढते श्री कृष्ण भगवान प्राची तक पहुंचे और यहां पर उद्धव को श्रीमद भगवत गीता का नाम पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर दिया था. आज भी वह पेपर का पेड़ यहीं पर है और इसका एक विशेष महत्व है. 



• सोमनाथ कैसे पहुंचे - How To Reach Somnath



       : हवाई मार्ग से सोमनाथ कैसे पहुंचे - How To Reach Somnath By Flight

       
Flight


     सोमनाथ में तो एयरपोर्ट की कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है. सबसे नजदीकी एयरपोर्ट दीव में है जो 63 किलोमीटर की दूरी पर है. और दूसरा हवाई अड्डा पोरबंदर में है जो 120 किलोमीटर की दूरी पर है. बाद में यहां से आप टैक्सी या बस से सोमनाथ पहुंच सकते हैं.


      : ट्रेन से सोमनाथ कैसे पहुंचे - How To Reach Somnath By Train

   
Train


     सोमनाथ का कोई रेलवे स्टेशन तो नहीं है लेकिन सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल में है जो  5 किलोमीटर दूर है. वेरावल रेलवे स्टेशन अहमदाबाद मुंबई और गुजरात के अन्य शहरों से जुड़ा हुआ है. वेरावल रेलवे स्टेशन से आपका बस या टैक्सी से सोमनाथ पहुंच सकते हैं.


       : मार्ग से सोमनाथ कैसे पहुंचे - How To Reach Somnath By Road



Road

      सोमनाथ जाने के लिए बस एक सबसे अच्छा साधन है. बहुत सारे विकल्प उपलब्ध है. आप पोरबंदर, राजकोट, अहमदाबाद से बस द्वारा सोमनाथ पहुंच सकते हैं. आप टैक्सी या प्राइवेट बस भी ले सकते हैं. सोमनाथ का मार्ग परिवहन बहुत अच्छा है. और वह छोटे बड़े सभी शहरों से जुड़ा हुआ है. बस द्वारा आप आसानी से सोमनाथ पहुंच सकते हैं.

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