मोढेरा सूर्य मंदिर पर्यटक स्थल बारे में जानकारी - Modhera Sun Temple Tourist Place In Hindi - Tourist and travel place

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Sunday, February 02, 2020

मोढेरा सूर्य मंदिर पर्यटक स्थल बारे में जानकारी - Modhera Sun Temple Tourist Place In Hindi

मोढेरा सूर्य मंदिर

        दोस्तों आज मैं आप मोढेरा का सूर्य मंदिर घूमने और इतिहास की जानकारी के बारे में बताऊंगा।

       
       यह मंदिर सूर्य देव को समर्पित है। और यह मंदिर बहुत ही पुराना है। या मंदिर हिंदू धर्म से जुड़ा हुआ है।यहां पर हर साल बहुत सारे पर्यटक इस भव्य मंदिर के दर्शन करने आते हैं।

      गुजरात के अहमदाबाद के पास एक छोटा सा गांव है मोढ़ेरा। यूं तो आज ये गुमनामी के अंधेरों में छुपा हुआ है लेकिन किसी ज़माने में यह एक शक्तिशाली राजधानी हुआ करता था। सोलंकी राजवंश ने यहां 942 ई. से 1305 ई. तक राज किया था। सोलंकी शासकों ने मोढ़ेरा सूर्य मंदिर बनवाया था जो पश्चिम भारत के शानदार मंदिरों में से एक माना जाता है।

      मोढ़ेरा सूर्य मंदिर मध्यकालीन भारत के भव्य और मनोरम मंदिरों में गिना जाता है। इसे सोलंकी साम्राज्य के राजा भीमदेव ने 11वीं शताब्दी में बनवाया था। मोढ़ेरा सूर्य मंदिर मारु-गुर्जर वास्तुकला शैली में बलुआ पत्थर का बना है। इस मंदिर के तीन मुख्य भाग हैं : गर्भ-गृह एवं गूढ़-मंडप, सभा-मंड़प एवं सूर्य-कुंड या बावड़ी।

       मुख्य मंदिर रजिसमें गर्भ-गृह है सभा-मंडप या रंग-मंडप कुंड (रामकुंड अथवा सूर्यकुंड) सूर्य देवता को समर्पित यह मंदिर अपनी बेहतरीन कारीगरी के लिए जाना जाता है। मध्य मंदिर और मंडप, दोनों ही चबूतरे पर बने हैं।
रामकुंड ओर सूर्यकुंड मोढेरा
        मंदिर हालंकि 11वीं सदी में बनकर तैयार हो गया था लेकिन इसका निर्माण चरणों में हुआ था। मंदिर बनने के बाद कुंड बना था और फिर बाद में मंडप का निर्माण हुआ। यह मंदिर कर्क रेखा के ऊपर स्थापित है।

       कहा जाता है कि मंदिर कुछ इस तरह से बनाया गया है कि सूर्योदय की पहली किरण पड़ते ही गर्भ-गृह में सूर्य का प्रतिबिंब दिखने लगता है लेकिन गर्मी के मौसम में सूर्य की किरणें सीधे मंदिर के ऊपर पड़ती हैं और मंदिर का साया नहीं पड़ता।

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       मंदिर का निर्माण 1026-27 ई. में हुआ था और इसका श्रेय राजा भीमदेव (1022-1063) को जाता है। पुरातत्ववेत्ता एच.डी. संखालिया के अनुसार मंदिर निर्माण की तारीख़ में विरोधाभास दो कारणों से है-मंदिर की पीछे की दीवार पर एक शिला-लेख है जो उल्टा लगा है। इस पर अंकित तारीख़ विक्रम संवत 1083 यानी 1026-27 ई. है लेकिन इसकी वास्तुकला दिलवाड़ा के आदिनाथ जैन मंदिर से मिलती जुलती है जिसका निर्माण 1031 ई. में हुआ था।

       सभामंडप मुख्य मंदिर दो भागों में बंटा हुआ है, गर्भ-गृह और गर्भ-मंडप। गर्भ-गृह 11 स्क्वैयर मीटर में बना हुआ है और यहां रखी देवी की प्रतिमा आज दुर्भाग्य से नदारद है। गर्भ-गृह के आस पास देवी की परिक्रमा के लिए प्रदक्षिण मार्ग है। प्रदक्षिण मार्ग में सूर्य देवता की सुंदर प्रतिमाएं हैं।
      
        मंदिर की भीतरी दीवारें हालंकि सादी हैं लेकिन प्रवेश द्वार पर सूर्य देवता की मूर्तियां हैं जिनके इर्द गिर्द नृतकों और रसिक प्रेमियों के चित्र हैं। ये भी समय के साथ साथ बुरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। मंदिर के ऊपर एक शिखर था जो समय के साथ ढह चुका है।

         संखालिया के मुताबिक़ कुंड के पास स्थित सभा-मंडप के सामने कभी कीर्ति तोरण (विजय को दर्शाता मेहराब) हुआ करता था। दुर्भाग्य से तोरण और इसका आधार, दोनों ही अब ग़ायब हो चुके हैं और बचे हैं तो सिर्फ़ दो स्तंभ जिससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि तोरण कभी इस जगह होगा। इन संतभों से कुंड की तरफ़ सीड़ियां जाती हैं। संखालिया बताते हैं कि मोढ़ेरा सूर्य मंदिर का कुंड संभवत: सहस्त्रलिंग तालाब से प्रेरित होकर बनवाया गया होगा। कुंड आयताकार पानी का टैंक है जिसके बाहर पत्थर लगे हुए हैं। कुंड के अंदर चारों तरफ़ बनी सीढ़ियों और मेड़ से कुंड की सतह तक पहुंचा जा सकता है। कुंड की दीवारों और सीढ़ियों पर कई छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं।
मोढेरा सूर्य मंदिर
         मंदिर के वास्तुकार का भले ही कुछ पता न हो लेकिन लेकिन इसकी भव्यता को देखकर कला इतिहासकार पर्सी ब्राउन ने अज्ञात वास्तुकार को ‘सपने बुनने वाला ’ कहा है।

         दिलचस्प बात ये है कि भारत में अन्य कई ऐतिहासिक जगहों की तरह मोढ़ेरा की भी पुन:खोज भी अंग्रेज़ों ने की थी। इसके बारे में सबसे पहले कर्नल एम. मोनियर-विलियम्स ने बताया था जिन्होंने 1809 में बतौर सर्वेयर जनरल अपनी रिपोर्ट में मंदिर की मौजूदगी के बारे में जानकारी दी थी। उनके बाद ए.के. फ़ोर्ब्स ने मंदिर के बारे में और जानकारी दी थी और इसकी खोज की योजना बनाई थी।

         आमतौर पर माना जाता है कि मोढ़ेरा मंदिर सूर्य देवता को समर्पित है लेकिन इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता कीर्ति मंकोड़ी का कहना है कि ये मंदिर सूर्य देवता के अलावा भगवान शिव सहित अन्य देवी-देवताओं का मिश्रण है जिन्हें उस समय पूजा जाता था।
        
       इस मंदिर में आज भले ही पूजा न होती हो लेकिन ये आज भी दर्शनीय है और सोलंकी राजवंश के गौरव तथा पहली सहस्राब्दी के शुरुआती वर्षों में उनकी उपलब्धियों का गवाह है


मोढेरा कैसे पहुंचे - How To Reach Modhera In Hindi


  : हवाई मार्ग से- By flight

हवाई मार्ग
          मोढेरा में कोई हवाई अड्डा तो नहीं है। लेकिन मोढेरा के सबसे पास में अहमदाबाद का हवाई अड्डा है। जो 106 किलोमीटर है। जो अन्य मुख्य हवाई अड्डे से जुड़ा हुआ है। यहां से आप टैक्सी या बस के द्वारा मोढेरा पहुंच सकते हैं।

   : रेल मार्ग से - By Train

रेल मार्ग
          सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन मेहसाणा में है। जो मोढेरा से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मेहसाणा का रेल परिवहन सभी मुखिया शहरों से जुड़ा हुआ है। यहां से आप लोकल बस से मोढेरा पहुंच सकते हैं।

   : मार्ग से - By Road

मार्ग से
         सड़क मार्ग से मोढेरा पहुंचने का सबसे अच्छा विकल्प है। गुजरात राज्य मार्ग परिवहन अच्छी तरह से मोढेरा से जुड़ा हुआ है। आप बस या टैक्सी मोढेरा पहुंच सकते हैं। आप ड्राइविंग करके भी अहमदाबाद से सीधे मोढेरा पहुंच सकते हैं।

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